बरेली। सदगुरु रामभद्राचार्य के पश्चिमी यूपी को मिनी पाकिस्तान

उन्होंने कहा कि मेरठ का संबंध 1857 की क्रांति से है, इसलिए उसे गलत ढंग से पेश करना न केवल ऐतिहासिक तथ्यों से खिलवाड़ है बल्कि समाज को बांटने की कोशिश भी है। व्यंग्य करते हुए आज़ाद ने कहा कि सुना है उन्हें (रामभद्राचार्य) बचपन से दिखाई नहीं देता। कहा जाता है इंसान को अपने पूर्व जन्मों के कर्मों का फल मिलता है, तो उन्होंने कितने बुरे कर्म किए होंगे कि कुदरत ने उन्हें आंखें नहीं दीं।
गौरतलब है कि रामभद्राचार्य के इस बयान के बाद विपक्ष लगातार हमलावर है, वहीं तमाम विरोध के बीच अब उन्हें एक महिला संत का समर्थन भी मिल गया है।

संविधान और चुनाव पर सवाल
चंद्रशेखर आज़ाद ने बरेली में आयोजित प्रबुद्ध सम्मेलन में कहा कि आज भारत का संविधान खतरे में है और इसे बचाने के लिए जनता को एकजुट होना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव में बरेली की सभी सीटों पर आजाद समाज पार्टी विरोधियों को कड़ी चुनौती देगी।
उन्होंने ईवीएम को लेकर भी सवाल खड़े किए। आज़ाद ने कहा कि जनता को ईवीएम पर भरोसा नहीं है। उन्होंने सम्मेलन में मौजूद लोगों से पूछा कि चुनाव ईवीएम से हों या बैलेट पेपर से—यह जनता का बड़ा सवाल है।
जातिगत गणना पर दो टूक
आजाद ने कहा कि देश में आखिरी बार जातिगत गणना 1971 में हुई थी। उसके बाद सिर्फ एससी-एसटी वर्ग की आंशिक गिनती हुई, लेकिन सम्पूर्ण जातिगत जनगणना अब तक नहीं कराई गई। उनकी मांग है कि जातिगत गणना के साथ आर्थिक आंकड़े भी जारी किए जाएं, ताकि यह साफ हो सके कि किस वर्ग के पास कितना संसाधन है और असली स्थिति क्या है।
उन्होंने कहा कि सही आंकड़े सामने आने पर ही समाज के कमजोर वर्गों को न्याय मिल पाएगा और समानता का सपना साकार होगा।
वसीम मियां ने रामभद्राचार्य के बयान की निंदा
सियासी मंच के प्रमुख वसीम मियां ने हिन्दू संत रामभद्राचार्य के आये एक बयान पर कहा कि आपने हिन्दू महिलाओं को देवी का दर्जा दिया है। लेकिन दूसरे धर्म की महिलाओं को यूज़ एन्ड थ्रो कहा , यह कहने का आपको किसने हक दिया है। उन्होंने कहा कि इस्लाम ने मां के पैरों की जन्नत होने की बात कही है। इतना ही नहीं इस्लाम ने महिलाओं को माँ बॉप और रिश्तेदारों की संपति में हिस्सा लेने का हक दिया है। इससे एक कदम बढ़कर इतिहास में देख ले इस्लाम ने महिलाओं को शासन करने के साथ शिक्षा लेने का अधिकार भी दिया है।

यही वजह है इतिहास में नूरजहां ,शाहजहां , रजिया के शासन करने का जिक्र भी मिलता है। इस्लाम उन धर्मो में भी शामिल है जो पुनर्विवाह को भी मान्यता भी देता है। रामभद्राचार्य जी अपने ज्ञान को बढ़ाये , हर धर्म दूसरे धर्म की इज्जत बढ़ाना सिखाता है।




