बरेली। निलंबित पीसीएस अधिकारी और पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री एक बार फिर अपने तीखे बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर बरेली पहुंचे अग्निहोत्री ने मीडिया से बातचीत में अपनी प्रस्तावित “सनातनी” राजनीतिक पार्टी को लेकर बड़ा संकेत दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी में जनरल, ओबीसी के साथ-साथ सनातनी एससी वर्ग को भी सम्मानजनक स्थान दिया जाएगा।
यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अग्निहोत्री पहले यूजीसी एक्ट 2026 और एससी-एसटी कानून को लेकर सरकार की नीतियों की खुलकर आलोचना करते रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने दावा किया कि उनके साथ “प्रभावित वर्ग” के रूप में जनरल, ओबीसी और सनातनी एससी समाज के लोग जुड़ रहे हैं।

नई राष्ट्रीय पार्टी बनाने का ऐलान
अलंकार अग्निहोत्री ने खुलासा किया कि वे जल्द ही एक नई राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी का गठन करने जा रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और अब एक नए विकल्प की जरूरत है। अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा का पारंपरिक कोर वोटर ,जिसमें जनरल और ओबीसी वर्ग की बड़ी हिस्सेदारी रही अब उनसे अलग हो चुका है।उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए उसे “छद्म सनातनी” बताया और कहा कि पार्टी केवल हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण और भय की राजनीति के सहारे चुनाव जीतती रही है।
एससी-एसटी एक्ट पर सरकार को घेरा
अग्निहोत्री ने एक बार फिर एससी-एसटी एक्ट को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने 2018 के चर्चित मामले Subhash Kashinath Mahajan v. State of Maharashtra का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बिना प्रारंभिक जांच गिरफ्तारी पर रोक और अग्रिम जमानत का प्रावधान सुझाया था।उनका आरोप है कि बाद में धारा 18A जोड़कर कानून को और कठोर बना दिया गया, जिससे जनरल वर्ग की भावनाओं की अनदेखी हुई। उन्होंने एक्ट को सबसे काला एक्ट करार भी दिया।
महाशिवरात्रि पर परशुराम धाम पहुंचे
रविवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर अग्निहोत्री बरेली के कैंट स्थित परशुराम धाम पहुंचे, जहां उन्होंने बाबा भोलेनाथ के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान उनके समर्थकों की भारी भीड़ मौजूद रही और फूल-मालाओं से उनका जोरदार स्वागत किया गया।
राजनीतिक हलकों में हलचल
अलंकार अग्निहोत्री के बयानों और नई पार्टी बनाने के ऐलान ने बरेली समेत प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। अब देखना होगा कि उनकी प्रस्तावित पार्टी को जमीन पर कितना समर्थन मिल पाता है और यह पहल किस दिशा में आगे बढ़ती है।



