बरेली। श्रमिकों और किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर सोमवार को बरेली में ट्रेड यूनियनों ने अपनी आवाज बुलंद की। केंद्रीय श्रमिक संगठनों और संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी प्रतिरोध दिवस के आह्वान पर बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों का ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम भेजा।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि श्रमिकों और किसानों के हितों से जुड़े अधिकारों को मजबूत किए जाने की जरूरत है। फेडरेशन की ओर से दिए गए ज्ञापन में श्रमिक संगठनों को स्वतंत्र रूप से ट्रेड यूनियन बनाने और सामूहिक सौदेबाजी का अधिकार सुनिश्चित करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
संगठन ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, बीमा और सामान्य बीमा संस्थानों के निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की। इसके साथ ही न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 42 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग रखी गई। बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले प्लेटफॉर्म व गिग वर्कर्स के लिए प्रभावी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की भी मांग की गई।
चार श्रम संहिताओं और बिजली संशोधन विधेयक का विरोध
फेडरेशन ने नई चार श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग की। साथ ही सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने और किसानों की सभी फसलों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी देने की मांग उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने विद्युत संशोधन विधेयक 2025 को वापस लेने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की।
कार्यक्रम के दौरान फेडरेशन अध्यक्ष मुकेश सक्सेना ने मांगों से संबंधित ज्ञापन को उपस्थित लोगों के सामने पढ़कर सुनाया। इसके बाद इसे सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से राष्ट्रपति को प्रेषित किया गया।
इस दौरान फेडरेशन के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा, ध्यान चंद्र मौर्य, केपी सिंह, हरिशंकर, सर्वेश, अधिवक्ता यशपाल सिंह, राजेश तिवारी, वीरपाल, मोइनुद्दीन, सतीश सिंह, रामसेवक, कैलाश क्रांतिकारी किसान संघ के हिमांशु, ओम प्रकाश समेत बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
वक्ताओं ने कहा कि श्रमिकों, किसानों और बेरोजगार युवाओं से जुड़े मुद्दों को सरकार के सामने लगातार उठाया जाएगा। उन्होंने मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम उठाए जाने की अपेक्षा जताई।



