बरेली। बहेड़ी के गन्ना उत्पादक डिग्री कॉलेज के एक शिक्षक का निष्कासन चर्चा का विषय बन गया है। छात्र हित, पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने के बाद कॉलेज प्रबंधन की कार्रवाई और शिक्षक के आरोपों ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। शिक्षक ने निष्कासन को अनुचित बताते हुए जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि कॉलेज प्रबंधन ने कार्रवाई को नियमों के अनुरूप बताया है।

गन्ना उत्पादक डिग्री कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं समाजवादी युवजन सभा के जिलाध्यक्ष डॉ. मोहित भारद्वाज का कहना है कि वह 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र आंदोलन में शामिल हुए थे। उनका आरोप है कि प्रदर्शन से पहले उन्हें घर पर नजरबंद करने का प्रयास किया गया, लेकिन वह अपने साथियों के साथ दिल्ली पहुंच गए। उनके अनुसार, 21 जुलाई को लौटने के बाद जब वह 22 जुलाई को कॉलेज पहुंचे तो उन्हें निष्कासन की सूचना दे दी गई।
डॉ. मोहित का आरोप है कि उनके खिलाफ यह कार्रवाई उनकी राजनीतिक सक्रियता और समाजवादी युवजन सभा से जुड़े होने के कारण की गई है। उन्होंने पूरे मामले की शिकायत जिलाधिकारी से कर निष्पक्ष जांच की मांग की है। जिलाधिकारी ने मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
वहीं, कॉलेज प्रबंधन ने शिक्षक के आरोपों से अलग पक्ष रखा है। गन्ना उत्पादक महाविद्यालय के प्रबंधक राजेंद्र कुमार का कहना है कि डॉ. मोहित भारद्वाज के खिलाफ लंबे समय से कई शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों पर कॉलेज प्रबंधन समिति ने विचार-विमर्श किया और समिति के निर्णय के आधार पर उन्हें सेवा से निष्कासित किया गया है। उनका कहना है कि कार्रवाई किसी राजनीतिक कारण से नहीं, बल्कि समिति के निर्णय के अनुसार की गई है।
फिलहाल, मामले में शिक्षक और कॉलेज प्रबंधन के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। अब सभी की नजर जिला प्रशासन की जांच और उसके निष्कर्ष पर टिकी हुई है।



