बरेली। टीजीटी भर्ती परीक्षा के दौरान बरेली में फर्जी अभ्यर्थी के जरिए परीक्षा दिलाने की कोशिश का मामला सामने आया है। परीक्षा की पहली पारी में एक युवक को दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देते हुए पकड़ लिया गया। बायोमेट्रिक सत्यापन और दस्तावेजों के मिलान में गड़बड़ी मिलने पर उसका भेद खुल गया। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इस काम के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये का लेन-देन तय हुआ था।
जानकारी के अनुसार, शहर क्षेत्र के एक परीक्षा केंद्र पर टीजीटी परीक्षा चल रही थी। परीक्षा शुरू होने के बाद अधिकारियों द्वारा अभ्यर्थियों के दस्तावेज और बायोमेट्रिक विवरण का सत्यापन किया जा रहा था। इसी दौरान एक परीक्षार्थी की पहचान को लेकर संदेह पैदा हुआ। जब उसके प्रवेश पत्र, पहचान पत्र और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड का मिलान किया गया तो विवरण मेल नहीं खाए।
अधिकारियों द्वारा पूछताछ किए जाने पर युवक ने स्वीकार किया कि वह वास्तविक अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने आया था। जांच में उसकी पहचान आजमगढ़ निवासी प्रमोद कुमार के रूप में हुई। वह फर्रुखाबाद निवासी अभ्यर्थी विमल कुमार के नाम पर परीक्षा दे रहा था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में यह जानकारी भी सामने आई कि परीक्षा में बैठने के लिए दोनों के बीच लगभग डेढ़ लाख रुपये का समझौता हुआ था। कथित तौर पर कुछ रकम पहले ही दी जा चुकी थी, जबकि शेष भुगतान परीक्षा में सफलता के बाद किया जाना था।
मामले की जानकारी मिलते ही परीक्षा केंद्र प्रशासन ने आरोपी को हिरासत में लेकर कोतवाली पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने मामले में विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है और वास्तविक अभ्यर्थी की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इसके अलावा यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कहीं इस पूरे प्रकरण के पीछे कोई संगठित सॉल्वर गिरोह या नकल माफिया तो सक्रिय नहीं है।
अधिकारियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कड़ी निगरानी की जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
एडीएम सिटी अविनाश त्रिपाठी ने बताया कि परीक्षा के दौरान एक अभ्यर्थी को दूसरे के स्थान पर परीक्षा देते हुए पकड़ा गया है। आरोपी को को कोतवाली पुलिस के हवाले किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।



