बरेली।गुजरात में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की चर्चा के बीच मुस्लिम समाज में नाराजगी बढ़ रही है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात ने इसे लेकर विरोध जताया है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात ने यूसीसी को लेकर अपना पक्ष सामने रखा है। जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने कहा कि देश में पहले से ही अलग-अलग समुदायों के लिए कानून बने हुए हैं, इसलिए नए कानून की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि गुजरात में यूसीसी लागू करने की कोशिश से मुस्लिम समाज खुद को मानसिक दबाव में महसूस कर रहा है। उनके मुताबिक, जो बातें सामने आ रही हैं, उनमें शादी का रजिस्ट्रेशन जरूरी करना, एक से ज्यादा शादी पर रोक, दो बच्चों की सीमा, तलाक के नियमों में बदलाव और हलाला-इद्दत पर रोक जैसे प्रावधान शामिल हैं, जो धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ हैं।
मौलाना ने कहा कि यूसीसी को शरीयत में दखल के रूप में देखा जा रहा है और मुस्लिम समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इसका असर सिर्फ मुसलमानों पर ही नहीं, बल्कि अन्य समुदायों पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि देश में पहले से संविधान और अलग-अलग पर्सनल लॉ के तहत व्यवस्थाएं चल रही हैं और वर्षों से यही प्रणाली लागू है। ऐसे में नए कानून की जरूरत नहीं है।मौलाना ने कहा कि पहले कानून आयोग ने यूसीसी को जरूरी नहीं बताया था, लेकिन अब इस पर फिर चर्चा हो रही है, जो हैरानी की बात है।
उन्होंने जानकारी दी कि आगे की रणनीति बनाने के लिए गुजरात के अहमदाबाद में जल्द ही उलेमाओं और बुद्धिजीवियों की बैठक होगी। इसमें देशभर में विरोध की योजना तय की जाएगी।
मौलाना ने कहा कि विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में रहकर किया जाएगा।



