पुश्तैनी हुनर से बदली किस्मत: टेराकोटा कला से लाखों की कमाई, 15 लोगों को दिया रोजगार

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बरेली के भोजीपुरा क्षेत्र का एक युवक अपनी पुश्तैनी कला को आधुनिक रूप देकर आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गया है। वह टेराकोटा कला के जरिए वह न सिर्फ लाखों कमा रहा है, बल्कि कई लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहा है।

भोजीपुरा थाना क्षेत्र के घघोंरा-घंघोरी गांव निवासी अमरपाल प्रजापति ने अपनी पारंपरिक मिट्टी की कला यानी टेराकोटा को नए अंदाज में ढालकर एक सफल व्यवसाय खड़ा किया है। आधुनिक डिजाइन और तकनीक के साथ तैयार किए गए उनके उत्पादों की बाजार में लगातार मांग बढ़ रही है।

अमरपाल द्वारा बनाए जाने वाले सजावटी और दैनिक उपयोग के टेराकोटा उत्पाद अब स्थानीय बाजार के साथ-साथ अन्य जगहों पर भी पसंद किए जा रहे हैं। बढ़ती मांग के चलते उन्हें हर महीने बड़ी संख्या में ऑर्डर मिल रहे हैं, जिससे उनकी आय लाखों रुपये तक पहुंच गई है।

अमरपाल का यह काम सिर्फ उनकी कमाई तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपने साथ करीब 15 लोगों को भी रोजगार दिया है, जिससे कई परिवारों की आजीविका चल रही है। उनके परिवार के सदस्य भी इस काम में सहयोग कर रहे हैं, जिससे यह कार्य एक छोटे उद्योग का रूप ले चुका है।

इसके अलावा अमरपाल अब तक जिले के लगभग 900 लोगों को टेराकोटा कला का प्रशिक्षण दे चुके हैं। उनके प्रशिक्षण से प्रेरित होकर कई लोग इस क्षेत्र में काम शुरू कर चुके हैं और आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

अमरपाल का कहना है कि यदि सरकार की ओर से आर्थिक सहयोग और बेहतर सुविधाएं मिलें, तो इस कार्य को और बड़े स्तर पर बढ़ाया जा सकता है। इससे रोजगार के और अधिक अवसर पैदा होंगे और पारंपरिक कला को भी नया जीवन मिलेगा।

गांव के लोग भी अमरपाल की मेहनत और लगन की सराहना कर रहे हैं। उनका मानना है कि अमरपाल ने यह साबित कर दिया है कि पारंपरिक हुनर को आधुनिक सोच के साथ जोड़कर बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

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Author: newsvoxindia

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