छात्र मंज़र-ए-इस्लाम की तालीम से दुनिया में फैलाएं इल्म की खुशबू : सुब्हानी मियां

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 बरेली। दरगाह आला हज़रत में हुज्जातुल इस्लाम मुफ्ती हामिद रज़ा खान साहब (हामिद मियां) का 85वां दो रोज़ा उर्स-ए-हामिदी का शुभारंभ दरगाह प्रमुख हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खान साहब (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) की सदारत में हुआ। कार्यक्रम का आगाज़ तिलावत-ए-कुरान से किया गया, जिसकी निगरानी सय्यद आसिफ मियां ने की।

सुबह 8 बजे हज़रत जिलानी मियां साहब के कुल शरीफ की रस्म हाजी गुलाम सुब्हानी की सरपरस्ती में अदा की गई। इसके बाद खत्म बुखारी शरीफ की महफिल आयोजित हुई, जिसमें मुरादाबाद से आए शेखुल हदीस मुफ़्ती अय्यूब ने आखिरी हदीस का दर्स देते हुए कहा कि इल्म-ए-दीन सीखना और सिखाना हर मुसलमान का फर्ज़ है। उलेमा का सम्मान करें, उनका मक़ाम बुलंद है।

मदरसा मंज़र-ए-इस्लाम के शिक्षक मुफ़्ती सलीम नूरी ने दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां का पैग़ाम सुनाते हुए कहा कि जिन छात्रों ने मंज़र-ए-इस्लाम से तालीम हासिल की है, वे दुनिया भर में इल्म की रौशनी फैलाएं और मसलक-ए-आला हज़रत के मिशन को आगे बढ़ाएं। उन्होंने बताया कि पहला दीक्षांत समारोह 1905 में मस्जिद बीबी जी में हुआ था और इसकी तरक्की में अल्लामा हसन रज़ा खान, मुफ़्ती-ए-आज़म हिंद और रेहान-ए-मिल्लत जैसे बुजुर्गों का अहम योगदान रहा है।

मदरसे के सदर मुफ़्ती आकिल रज़वी ने इल्मे हदीस पर तफसील से रौशनी डाली। दरगाह से जुड़े नासिर कुरैशी ने बताया कि सुबह 10:30 बजे जिलानी मियां के 62वें कुल शरीफ की रस्म अदा की गई, जिसमें फातिहा मुफ़्ती तय्यब रज़ा, शजरा कारी अब्दुर्रहमान खान क़ादरी और दुआ मुफ़्ती कफील हाशमी ने की।

रात 9 बजे ऑल इंडिया तहरीरी, तक़रीरी और मुशायरे का मुकाबला शुरू हुआ, जो देर रात तक चला। इसकी निगरानी मुफ़्ती आकिल रज़वी, मुफ़्ती सलीम नूरी, मुफ़्ती अय्यूब खान और मौलाना डॉक्टर एजाज़ अंजुम समेत कई उलेमा ने की।

कल का कार्यक्रम: फज्र की नमाज के बाद कुरानख्वानी, दिन में गुलपोशी और चादरपोशी होगी। मुख्य कार्यक्रम रात 9 बजे शुरू होगा, जिसमें देशभर के नामवर उलेमा की तकरीरें होंगी। रात 10:35 बजे हुज्जातुल इस्लाम के कुल शरीफ की रस्म के बाद मदरसा मंज़र-ए-इस्लाम का दीक्षांत समारोह (दस्तारबंदी) आयोजित किया जाएगा।

उर्स की व्यवस्था में मौलाना अबरार उल हक, सय्यद जुल्फी, नाजिम रज़ा, हाजी जावेद खान, नासिर कुरैशी, परवेज़ नूरी, शान रज़ा, सुहैल रज़ा और हाजी अब्बास नूरी सहित बड़ी संख्या में रज़ाकारों ने भागीदारी निभाई।

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Author: newsvoxindia

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