बरेली: भतीजों के हत्यारे चाचा को आजीवन कारावास, 10 लाख जुर्माना

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बरेली, एनवीआई रिपोर्टर

नौ साल पहले जमीन बंटवारे के विवाद में दो भतीजों की गोली मारकर हत्या करने के जुर्म में थाना बहेड़ी क्षेत्र के नौगवां निवासी राजेन्द्र सिंह को दोषी पाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश तबरेज आलम ने सश्रम आजीवन कारावास और 10 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, राजेन्द्र के भाई जितेन्द्र सिंह को संदेह का लाभ प्रदान करते हुए बरी कर दिया गया। जुर्माने की आधी-आधी रकम दोनों मृतकों के परिजनों को बतौर मुआवजा दी जायेगी।

सरकारी वकील राजेश्वरी गंगवार ने बताया कि वादी सत्यपाल सिंह ने थाना बहेड़ी में तहरीर देकर बताया था कि उसके व चचेरे भाई राजेन्द्र सिंह का जमीन के बंटवारे को लेकर उपजिलाधिकारी कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। इसी वजह से राजेन्द्र सिंह रंजिश मानता था व राजेन्द्र का भतीजा जगतार सिंह उसके व राजेन्द्र सिंह की जमीन के विवाद का फैसला करा रहा था कि उसे दो बीघा जमीन कम दे दो। यह बात राजेन्द्र सिंह व उसके भाई जितेंद्र सिंह को नागवार लगी।

राजेन्द्र सिंह ने 23 नवम्बर 2016 की दोपहर 2.45 बजे लाइसेंसी रायफल लेकर जगतार सिंह के खेत पर पहुंच गया और उसे गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गयी। जगतार के गन्ने के खेत पर गांव के ही बुद्वसेन, सत्यपाल, वेदप्रकाश व चन्द्रपाल आदि गन्ने की ट्राली भर रहे थे। इसके बाद राजेन्द्र गांव की तरफ आया वहां खड़े मनोहर सिंह, प्रवेन्द्र सिंह व सुखवेन्द्र सिंह व वह स्वयं खड़े थे। राजेंद्र ने अपनी रायफल से जान से मारने की नीयत से प्रवेन्द्र सिंह को गोली मार दी। इसके बाद उन तीनों ने भागकर जान बचाई, वर्ना वह उन्हें भी मार देता। गंभीर घायल प्रवेन्द्र को अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने दो भाइयों के विरुद्ध हत्या, आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना के दौरान आला कत्ल रायफल और 15 जिंदा कारतूस भी बरामद किये थे। अभियोजन ने 12 गवाह व विधि विज्ञान प्रयोगशाला रिपोर्ट समेत 21 सबूत अदालत में पेश किये। अदालत ने 58 पेज के जजमेंट में सुप्रीम कोर्ट की विधि व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि प्रत्येक न्यायालय का कर्तव्य है कि वह अपराध की प्रकृति और जिस प्रकार से अपराध किया गया है उसे ध्यान में रखते हुए सजा दे।

यदि उस अपराध के लिए उचित सजा नहीं दी गयी जो केवल व्यक्तिगत पीड़ित के खिलाफ बल्कि समाज के खिलाफ भी किया गया है, जिससे अपराधी और पीड़ित संबंधित हैं। यदि उचित सजा नहीं दी गई तो अदालत अपने कर्तव्य में असफल होगी।

दोषी की बीमारी की दलील काम नहीं आई

मुल्जिम के वकील मिलन कुमार गुप्ता ने तर्क दिया कि दोष सिद्ध के दोनों गुर्दे खराब हैं और उसे हर सप्ताह डायलिसिस कराने के लिए केजीएमसी लखनऊ जाना होता है, राजेन्द्र सिंह का पागल हो जाने के कारण कई वर्षों तक बनारस मानसिक चिकित्सालय में इलाज चला और भर्ती रहा। दोषी इतना बीमार है कि वह अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर है, कम से कम सजा की याचना की, लेकिन बचाव पक्ष की दलील को कोर्ट ने नहीं माना।

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Author: newsvoxindia

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