बरेली: करीब पांच साल पहले किराए की बिल्डिंग खाली करने को लेकर हुए विवाद में अस्पताल प्रबंधक की चाकू से गोदकर हत्या करने के जुर्म में थाना शाही के गांव दुनका निवासी इमरान उर्फ छोटे को कोर्ट ने दोषी पाया है। अपर सत्र न्यायाधीश अमृता शुक्ला ने इमरान को सश्रम आजीवन कारावास और 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
सरकारी वकील सचिन जायसवाल के अनुसार शाही आनन्दपुर गांव निवासी हरिओम ने शाही थाने में लिखाई में बताया था कि उनके भाई संजय सिंह दुनका में अनन्त जीवन अस्पताल के प्रबंधक थे। हरिओम अपने भाई के साथ अस्पताल संचालन में सहयोग करते थे। 16 सितंबर 2020 को हरिओम अपने मामा नत्थू सिंह और भाई संजय सिंह के साथ अस्पताल में सो रहे थे। देर रात 3.30 बजे अचानक चीख सुनकर उनकी आंख खुल गई।
हरिओम के मुताबिक उन्होंने देखा कि संजय सिंह को चाकू से इमरान मार रहा था। चिल्लाने पर इमरान लोहे के गेट से निकलकर भाग गया। हत्या अस्पताल बिल्डिंग के मालिक रोहित गुप्ता उर्फ राजा ने अपने ड्राइवर से कराई। पूर्व में भी कई बार वह संजय सिंह को हत्या करने की धमकी दे चुका था। पुलिस ने इमरान और रोहित के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने विवेचना के बाद सिर्फ इमरान के विरुद्ध आरोप पत्र कोर्ट भेजा था। मुकदमा चलने के दौरान अभियोजन ने नौ गवाह पेश किए।
विवेचक ने मुख्य आरोपी का नाम निकाल दिया, जांच के आदेश
विवेचना के दौरान केस के प्रथम विवेचक वीरेंद्र सिंह राणा और निरीक्षक शोएब मियां ने हत्या के मुख्य आरोपी रोहित गुप्ता उर्फ राजा का नाम विवेचना दौरान निकाल दिया, और सिर्फ इमरान को ही आरोपी बनाकर चार्जशीट कोर्ट भेजी थी। अभियोजन द्वारा पेश धारा 319 सीआरपीसी की अर्जी पर कोर्ट ने गवाहों की गवाही के आधार पर कोर्ट ने रोहित को ट्रायल के लिए तलब किया था। कोर्ट ने टिप्पणी कि घटना के मोटिव को अनदेखा करके बर्बर हत्या जैसे केस में विवेचकों ने विवेचना के दौरान जानबूझकर उपेक्षापूर्ण कृत्य किया है, जो जांच कराए जाने योग्य है। अधिकांश गवाहों की गवाही हो जाने के कारण रोहित गुप्ता की पत्रावली अलग से विचाराधीन है।
