थिएटर फेस्ट के 11वें दिन हुआ नौकरशाही और सत्ता के गठबंधन को उजागर करता नाटक अंधो का हाथी

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बरेली। रंगालय एकेडमी ऑफ आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी द्वारा थिएटर अड्डा के 15 दिवसीय थिएटर फेस्ट के 11वें दिन सोशल डिवाइन डेवलपमेन्ट ऑर्गनाइज़ेशन पटना (बिहार) ने शरद जोशी द्वारा लिखित एवं स्वरम उपाध्याय द्वारा निर्देशित नाटक “अंधो का हाथी” मंचित किया। लोक खुशहाली चैरिटेबल ट्रस्ट सभागार में मंचित हुए नाटक ‘अंधो का हाथी’ ने नौकरशाही और सत्ता के गठबंधन को उजागर किया।

 

 

नाटक की शुरुआत में सूत्रधार एक काल्पनिक हाथी को लेकर मंच पर आता है। तो वहाँ पांच अंधे उस हाथी को छूकर अपने अपने तरीके से हाथी के आकार की व्याख्या करते है। जिसके हाथ मे पूंछ आती है वो कहता है कि हाथी रस्सी की तरह होता है।जिसके हाथ मे हाथी का पैर होता है वो उसे पिलर की तरह बताता है। यानी कि उन अन्धो के द्रष्टिकोण से हाथी का आकार उनके अनुसार है।

 

 

लेखक ने अंधो को माध्यम बनाकर राजनैतिक मकड़जाल में फंसी जनता का सजीव चित्रण किया। नाटक के अंत मे जब सूत्रधार उन अंधो को हाथी का असली रूप दिखाने की कोशिश करता हैं तो वो अंधे अपनी अंधी आस्था के वशीभूत सूत्रधार को मार डालते है। क्योंकि वो सच्चाई जानना ही नही चाहते। नाटक के द्वारा लेखक ने सिद्ध किया कि भीड़ का कोई विवेक नही होता है। नाटक का निर्देशन, अभिनय स्वरम उपाध्याय ने किया।

लोक खुशहाली चैरिटबल ट्रस्ट सभागार में कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. विनोद पागरानी ने दीप प्रज्वलित कर किया।

थिएटर फेस्ट का संयोजन शैलेन्द्र आज़ाद ने किया। कार्यक्रम मे शालिनी गुप्ता, शुभी, अजय गौतम, सुशील, मोहित, सचिन श्याम भारतीय, महेंद्र पाल राही का विशेष सहयोग रहा।

 

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Author: newsvoxindia

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