
अनंत पुण्य दायिनी सोमवती अमावस्या 12 अप्रैल को
12 अप्रैल को साल की पहली सोमवती अमावस्या है। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। इस अमावस्या को हिन्दू धर्म में पर्व कहा गया है। इस दिन पूजा-पाठ, व्रत, स्नान और दान करने से कई यज्ञों का फल मिलता है। सोमवती अमावस्या पर तीर्थ स्नान करने से कभी खत्म नहीं होने वाला पुण्य मिलता है। लेकिन कोरोना महामारी के चलते घर पर ही पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे मिलाकर नहाने से भी तीर्थ स्नान का फल मिलेगा।
इस साल में सिर्फ 2 ही सोमवती अमावस्या
12 अप्रैल को हिंदू कैलेंडर की पहली अमावस्या है। इस दिन सोमवार होने से साल का पहला सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। इसके बाद इस साल की दूसरी और आखिरी सोमवती अमावस्या 6 सितंबर को आएगी। सोमवती अमावस्या का शुभ संयोग हर साल में 2 या 3 बार ही बनता है।
सोमवती अमावस्या का महत्व
सोमवती अमावस्या के दिन की जाने वाली पूजा, स्नान और दान आदि का विशेष पुण्य जीवन में प्राप्त होता है. इस दिन पितरों को भी याद किया जाता है. इस दिन पवित्र नदी में स्नान किया जाता है. पितरों को प्रसन्न करने के लिए सोमवती अमावस्या दिन शुभ माना गया है. जिन लोगों की जन्म कुंडली में पितृ दोष की स्थिति बनी हुई है, वे इस दिन पितरों की पूजा अवश्य करें. ऐसा करने से पितरों का आर्शीवाद प्राप्त होता है और जीवन में आने वाली कई परेशानियों से मुक्ति मिलती है.
सोमवती अमावस्या का मुहूर्त
सोमवती अमावस्या का प्रारंभ: 11 अप्रैल, रविवार प्रात: 06 बजकर 03 मिनट से.
सोमवती अमावस्या का समापन: 12 अप्रैल, सोमवार को प्रात: 08:00 बजे तक.
ये काम बिल्कुल न करें
– सोमवती अमावस्या के दिन भूलकर भी तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, अंडा, प्याज, लहसुन इनका प्रयोग न करें।
– घर में लड़ाई-झगड़ा नहीं करें। झगड़े और विवादों से बचना चाहिए। झूठ न बोलें और किसी को कड़वे वचन न कहें, घर के बुजुर्ग लोगों का भूलकर भी अपमान न करें।
– आज के दिन शरीर पर तेल नहीं लगाना चाहिए, तेल मालिश नहीं करें।
– इस दिन स्त्री-पुरुषों को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
– आज के दिन नहाते समय और नहाने से पहले तक कुछ न बोलें, हो सके तो आज के दिन कुछ समय के लिए मौन धारण अवश्य करें।
ज्योतिषाचार्य
पंडित मुकेश मिश्रा




