
हिंदुओं का नवीन वर्ष चैत्र माह शुक्ल पक्ष की पड़वा से प्रारंभ होता है. इस वर्ष विक्रम संवत 2078 वां वर्ष होगा. और शालीवाहन शकः 1943 बॉं वर्ष होगा.
आज की नवीन पीढ़ी को यह जानना आवश्यक है यह नवीन वर्ष किन के नाम पर मनाया जाता है, वर्तमान में मध्य प्रदेश स्थान उज्जैन के चक्रवर्ती सम्राट महाराजा विक्रमादित्य जिन्होंने इस पृथ्वी के बहुत बड़े क्षेत्र को अपने राज्य में मिला लिया था. भविष्य पुराण के अनुसार महाराज विक्रम ने 100 वर्ष तक राज्य किया, उनका पुत्र हुआ देशभक्त, देव भक्त ने 10 वर्षों तक राज्य किया. देव भक्त दुष्ट शकों द्वारा मारा गया. देशभक्त का पुत्र हुआ शालीवाहन. शालीवाहन ने शकों को जीतकर 60 वर्ष तक राज्य किया. अनंतर वह भी दिवंगत हो गया.राजा विक्रम के पुत्र के पुत्र का नाम शालीवाहन था उसके नाम पर शालीवाहन शकः संवत प्रारंभ हुई. जो वर्तमान में 1943 वां वर्ष है.राजा विक्रम शिव जी और देवी जी के भक्त थे, तभी से नवीन वर्ष देवी जी के पूजा पाठ के द्वारा मनाने का चलन तेजी के साथ बढ़ा.सनातन धर्म मैं नव वर्ष उत्सव को 9 दिन व्रत रखकर बहुत ही उत्साह के साथ धर्म-कर्म के द्वारा मनाने का चलन है, इस 7 दिन में अधिकांश लोग व्रत रखते हैं रात्रि में देवी जी की आराधना करते हैं, अधिकांश भक्त दुर्गा सप्तशती और मार्कंडेय पुराण का पाठ बार-बार करते हैं.
यह कालखंड देवी साधना के लिए सर्वोत्तम होता है.
इस बार नववर्ष को मेष की संक्रांति भी है. सूर्य जब मेष राशि में आता है तब उसे मेष की संक्रांति कहते हैं. उच्च का सूर्य साधनाओं के लिए बहुत उत्तम काल होता है.
कैसे करें नवरात्रि में पूजा- नित्य कर्म स्नानादि करके, जल से तीन बार आचमन करें ताकि शरीर अंदर से शुद्ध हो जाए. कलश की स्थापना करें. कलश में औषधीय युक्त जल रखें( औषधियों में मुलेठी. अश्वगंधा, हरिद्रा, हरड़, बहेड़ा, आंवला, शतावर)- इस औषधि युक्त जल का नित्य सेवन करने से शरीर लंबे समय तक निरोग रहेगा.
घट स्थापन- एक मिट्टी के घट में, गंगाजल भरे, उसके ऊपर आम के पत्तों से सज्जा करते हुए नारियल स्थापित करें, नारियल को देवी का स्वरूप मानते हुए वस्त्र से आच्छादित करें.
फिर सामर्थ्य अनुसार पंचोपचार( धूप, दीप, जल का पात्र, अक्षत, पुष्प) पूजा करें. यदि सामर्थ है तो रोली, सिंदूर, श्रंगार की समस्त सामग्री, ऋतु फल, वस्त्र, उप वस्त्र, आभूषण. नैवेद्य( घर में बने भोग की सामग्री- जैसे कतली- लड्डू) से पूजा करें.
एकाग्र मन से दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करें.
कैसा रहेगा विक्रम संवत 2078 आपके लिए-
मेष राशि- लाभकारी रहेगा.
वृषभ राशि- तनाव- घरेलू झगड़े झंझट- नवीन कारोबार का प्रारंभ.
मिथुन राशि- कर्ज बढ़ना रुकेगा.
कर्क राशि- कर्ज वृद्धि
सिंह राशि- विवाह योग के जातकों के विवाह के प्रस्ताव.
कन्या राशि- रोग धन व्यय.
तुला राशि- सामान्य लाभ, विद्यार्थी वर्ग लाभ में.
वृश्चिक राशि- अत्याधिक खर्च हो. कर्ज संभव, मानसिक तनाव.
धनु राशि- विवाह योग्य जातकों को विवाह के प्रस्ताव मिले.
मकर राशि- पिछले वर्ष की तुलना में धन वृद्धि.
कुंभ राशि- स्वास्थ्य में सुधार, घर में कलेश बना रहे.
मीन राशि- रोग पर खर्चा होगा.
पंडित राकेश पांडे ने बताया- नवरात्रि पूजा में नवरात्रि की पूजा सिद्धिदात्री है, अर्थात कार्य सिद्धि को प्रदान करने वाली. इसलिए श्रद्धालुओं को नवमी की रात्रि में विशेष अनुष्ठान पूर्वक पूजा करना चाहिए. और दशमी तिथि को देवी की विदा अथवा देवी प्रतिमा का विसर्जन करना चाहिए.
लगातार नौ व्रत करने से करने से शरीर में रोग से लड़ने की शक्ति उत्पन्न होती है. शरीर में नवीन ऊर्जा का संचार होता है.आप अधिक जानकारी के लिए पंडित राकेश पांडे से 91+9837235505 इस नंबर पर संपर्क कर सकते है |




