15 अगस्त स्पेशल :  आजादी के अभी भी कई मायने , आखिरी पायदान तक मिले सभी को समान सुविधाएं 

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देश बदल रहा है , हर तरफ विकास की गंगा बह  रही है | लेकिन इसके बावजूद भी देश में तमाम संभावनाएं है | 15 अगस्त को ध्यान में रखते हुए  आपके newsvox 

पोर्टल ने उन बुद्धिजीवियों से बात की जो आपके अधिकार और हक की आवाज उठाते  है | जानिए पत्रकारों की नजर से आजादी के मायने  उनके हिसाब से  क्या है ? 

देश के शिक्षा और स्वास्थ्य महकमे में बहुत बड़े सुधार की आवश्यकता है। सरकारी स्कूलों के शिक्षक बहुत योग्य होते है इसी तरह सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर्स भी बहुत योग्य होते है। लेकिन दुर्भाग्य ये है न तो सरकारी स्कूलों में सही पढ़ाई होती है न ही सरकारी अस्पतालों में सही इलाज। सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर्स निजी अस्पतालों में इलाज करवाते है और सरकारी स्कूलों के शिक्षक कॉन्वेंट में अपने बच्चो को पढ़ाते है। डॉक्टर हो या शिक्षक ऐसा लगता है दोनो को अपनी काबिलियत पर भरोसा नही है। हालांकि ऐसा सबके लिए नही कुछ शिक्षक होंगे जो अपने बच्चो को सरकारी स्कूल में पढ़ाते होंगे और कुछ डॉक्टर भी अपना इलाज सरकारी अस्पताल में ही कराते होंगे।हालांकि वर्तमान सरकार ने सरकारी स्कूलों और अस्पतालो की इमारतों को काफी हद तक सुधार करवाया, नए अस्पताल भी बने। लेकिन सरकारी स्कूलों में पर्याय शिक्षक और अन्य स्टाफ नही होता और यही हाल सरकारी अस्पतालों का होता है। वहां की पर्याप्त स्टाफ नही है और न ही विशेषज्ञ डॉक्टर है। यही वजह से की बेचारी जनता परेशान है।
काश ऐसा हो जाये तो कितना अच्छा होगा। सरकारी स्कूलों में कान्वेंट स्कूलों की तरह पढ़ाई हो। वहां पर पर्याप्त शिक्षक और अन्य स्टाफ हो। लोग कॉन्वेंट से नाम कटवाकर सरकारी स्कूलों में बच्चो का एडमीशन करवाये। कलक्टर, इंजीनियर, डॉक्टर, शिक्षक, उधोगपति के बच्चे भी सरकारी स्कूल में पढ़े और देश का नाम रोशन करें। काश सरकारी अस्पतालों में सारी सुविधाएं मुहैया हो जाए, वहां सभी विशेषज्ञ डॉक्टर हो, सभी तरह की जांच हो, पर्याप्त बेड और सभी तरह की दवाएं उपलब्ध हो। कलक्टर, इंजीनियर, डॉक्टर, शिक्षक, उधोगपति सभी सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने जाए। काश ऐसा हो जाये कि किसान सीधे बाजार में अपना राशन ले जाये और किसी बिचौलिए के बीच मे न फसे और पूरा पैसा किसान को ही मिले। काश धार्मिक स्थलों से ज्यादा सरकारी अस्पताल, सरकारी स्कूल हो। अगर ऐसा हो जाये तो कोई भी देश का नागरिक दुखी नही रहेगा।

अनूप मिश्रा ,
सीनियर टीवी जर्नलिस्ट 

15 अगस्त स्पेशल :  आजादी के अभी भी कई मायने , आखिरी पायदान तक मिले सभी को समान सुविधाएं 

हम आज बेहद खूबसूरत देश में रह रहे हैं ,खुली हवा में सांस ले रहे हैं,उन महान क्रांतिकारी विचारों उन महान विभूतियों का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता,जिन्होंने देश को आजाद कराने में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।हमें व हमारी पीढ़ियों को उन महान शख्सियतों के बारे में पता चलना बेहद ज़रूरी है जिनके तप ,पराक्रम के वजह से आज हम स्वतंत्र हैं।हम शुक्रगुजार हैं ,आभारी हैं उन सभी के जिन्होंने हमें व  माँ भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने में  अपना योगदान दिया।सरकार व्यवस्था करे ऐसे महापुरुषों ,महान क्रांतिवीरों के बारे में जनजागरण करते हुए आजादी के लिए किए गए तप और संघर्ष की गाथा को हर भारतवासी तक पहुंचाने व जानकारी देने के लिए।ताकि हम आजादी की क़ीमत जान सकें ,पहचान सकें कि हमारे आज के लिए कैसे हमारे पूर्वजों ने अपना सब कुछ कल न्यौछावर किया था,बिना किसी भेदभाव के एक होकर।

श्रीपाल तेवतिया,
सीनियर डिजिटल जर्नलिस्ट
 

आजादी का अर्थ है कि पूर्ण रूप से स्वतंत्र होना है अर्थात किसी भी रूप में आप पर किसी का नियंत्रण न हो। स्वाभाविक रूप से जो हमारे अधिकार है उनकी स्वंत्रता हमें मिलनी चाहिए। एक बच्चे का अपने माता-पिता का प्यार पाना उसकी अधिकारिक स्वंत्रता है। भूख लगने पर बच्चे का रोना स्वाभाविक लक्षण है। आज के इस बदलते युग में एक ओर जहां महिलाएं हर मामले मे पुरुषों की बराबरी कर रह‍ी है। वहीं आज भी कई घर ऐसे है जिसमें नारियों की वह बराबरी पुरुषों को, उनके घर वालों को रास नही आती। आज भी महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों में कोई कमी नही आई है।।
कपिल यादव
 प्रिंट पत्रकार 

भारत सरकार अपने देश के नागरिकों के  स्वास्थ्य , रोजगार के मुद्दे पर बढ़चढ़कर काम कर रही है | लेकिन इस बीच देश की मीडिया से खबरें आती है कि किसान ने आत्महत्या कर  ली  , किसी बेरोजगार युवक  ने रोजगार नहीं मिलने के चलते आत्महत्या कर ली , यह सब वह मुद्दे है जो हमे नीचे स्तर से सोचने को मजबूर करते है कहा कमी रह गई की हम आजादी के लम्बे समय बाद भी इनसे पार नहीं पा सके | 

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Author: cradmin

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