कोरोना काल में आईएएस अरविंद  ने आचार बनाने वाली महिलाओं से पीपीई किट बनवाकर जीता था देश का दिल ! 

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गोपाल गिरि 
लखीमपुर खीरी के आईएएस मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार सिंह ने पिछले कोरोना की  लहर में इतिहास रचा था और अपने जिले के लिए ही नहीं बल्कि प्रदेश के कई संस्थानों  के लिए भी कोरोना योद्धा बनते हुए लोगों के रोल मॉडल बने थे| जब  देश में कोरोना महामारी से लड़ने के लिए पीपीई किट के लिए मारामारी मची थी ,डॉक्टर से लेकर एंबुलेंस ड्राइवर तक हड़ताल पर थे तो यही समस्या जनपद के सामने सीना तान कर खड़ी थी | यहां भी पूरा प्रशासनिक अमला आशंका में था|  ऐसे में इनका डर कम करने का जिम्मा उठाया था  सीडीओ आईएएस अरविंद सिंह ने|  अरविंद ने  एक ऑपरेशन चलाया ‘मिशन कवच’ नाम से |मगर ये सब इतना आसान नहीं था|  अरविंद ने पीपीई किट में लगने वाले सामान और डिजाइन की जानकारी जुटानी शुरू की| इंटरनेट पर. डॉक्टरों से सलाह ली|  डिजाइन तैयार की|  मगर उस वक्त जितना मुश्किल पीपीई किट मिलना था | उतना ही मुश्किल इसका सामान मिलना था|  सबसे बड़ी दिक्कत ‘लेमिनेटेड पॉली प्रॉपलीन’ मिलना था वह  भी लखीमपुर खीरी जैसे छोटे जिले में|  कानपुर, लखनऊ जैसे बड़े शहरों से ‘लेमिनेटेड पॉली प्रॉपलीन’ का इंतजाम हुआ|  इसके बाद अरविंद ने ‘नेशनल रूरल लाइवीहुड मिशन’ (एनआरएलएम) से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की पांच महिलाओं को चुना|  महिलाओं को सबसे पहले पीपीई किट, मास्क आदि बनाने की ट्रेनिंग दिलवाई और फिर काम शुरू हो गया| पहले तैयार हुई किटों पर विशेषज्ञों द्वारा बताए गए बदलाव करवा दिए गए, अंत में जो किट तैयार हुई, उसकी सब जगह तारीफ होने लगी|  गौरतलब है  ये काम खुद में अजूबा था. वह  इसलिए भी क्योंकि अरविंद ने ये पीपीई किट उन महिलाओं से बनवाई थीं, जो अचार बनाने का काम करती थीं| स्किल इंडिया का असली मॉडल खड़ा कर दिखाया था| 9 अप्रैल को अरविंद के पास एक लेटर आया  इंडियन आर्मी की मध्य कमान मुख्यालय की तरफ से|  आर्मी ने  पीपीई किट्स के ऑर्डर के लिए सैंपल मांगा था|  सैंपल  भी भेजे गए |  आर्मी के डॉक्टरों को सैंपल भी  पसंद आये |  आर्मी ने तुरंत 2000 किट्स का ऑर्डर दे दिया|  अरविंद ने इस ऑर्डर को पूरा करने के लिए इन पांच महिलाओं से 20 और महिलाओं को ट्रेनिंग दिलवाई  और 25 महिलाएं जोर-शोर ये काम करने लगीं| 10 दिन के अंदर ये डिलिवरी कर दी| इंडियन आर्मी, एसएसबी और यूपी के तमाम जिलों के प्रशासनिक अमलों ने ये पीपीई किट लीं और अप्रैल खत्म होने तक ये ऑपरेशन चला और खाली कोरोना से लड़ाई में योगदान नहीं बल्कि कोरोना के समय लोगों के सामने आया रोजी-रोटी के संकट के लिए भी अरविंद सिंह ने अपनी जबरदस्त प्लानिंग के चलते कामयाबी पाई थी उन्होंने ऑपरेश  चतुर्भुज चलाकर जहां एक काम करने के लोगों को बेहतरीन मॉडल दिया था तो वही कोरना काल में  बाहर से आये प्रवासियों के  लिए रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराये | अरविन्द ने कोरोना के चलते गांव लौटे प्रवासियों को काम देने का खाका खींचा| वह  सिर्फ इस एक गांव में नहीं, बल्कि पूरे जिले में| अरविंद और उनकी टीम ने  लखीमपुर जिले में अवैध कब्जे वाले 2,500 किलोमीटर लंबे सेक्टर मार्ग और चकमार्ग को चिह्नित कर लिया था| 21 अप्रैल को जैसे ही मनरेगा के तहत सरकार ने काम करवाने की अनुमति मिली, ऑपरेशन चतुर्भुज चालू हो गया|  और इस तरह पहले ही दिन 21 अप्रैल से लखीमपुर यूपी में मनरेगा के तहत में सबसे ज्यादा रोजगार प्रदान करने वाला जिला बन गया था| जब  एक बार फिर कोरोनावायरस की लहर ने देश में रफ्तार पकड़ ली है और स्थिति पहले से ज्यादा भयावह है  ऐसे में अरविंद की ओर पूरा जिला देख रहा है | 

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Author: cradmin

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