
बरेली: बनारस की ज्ञानवापी मस्जिद के मामले में चल रहे मुकदमे पर कल बनारस फास्ट ट्रेक कोर्ट के दिये गये फैसले पर आल इंडिया तंजीम उलमा ए इस्लाम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बनारस की ऐतिहासिक ज्ञानवापी मस्जिद मुगल बादशाह हज़रत ओरंगजेब आलमगीर ने बनवायी थी ये सरासर झूठ बात है | वही हज़रत ओरंगजेब आलमगीर ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाई ,1669 सन् के वक्फ नामा का हवाला दिया जा रहा है मगर उसके अध्ययन से कही यह बात साबित नहीं होती की मंदिर को तोडा गया है हज़रत ओरंगजेब की शख़्सियत को पढ़े तो पता चलेगा कि उन्होंने सैकड़ों मदिरो के रख रखाव के लिए हजारों बीधा जमीनें दान की, उनका एक मशहूर वाक्या इतिहास के पन्नों में महफूज़ है कि उन्होंने बनारस की ब्राह्मण लड़की “शाकुन्तला” को सुरक्षा प्रदान की थी, उस लड़की पर गलत नजर रखने वाले एक मुसलमान कोतवाल को फांसी की सज़ा दी थी अब ऐसे बादशाह के तालूक से यह कैसे मुमकिन हो सकता है कि वो मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाई|मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने कहा कि सिविल जज के फैसले के ख़िलाफ़ मुस्लिम पक्ष फैसले का अध्ययन करने के बाद जिला कोर्ट में अपील दायर करेगा, चूकि इसी से सम्बन्धित हाईकोर्ट में एक मुकदमा विचाराधीन है, कानून यह कहता है कि अगर एक ही मामले में सिविल जज और हाईकोर्ट में केस चल रहा है तो हाईकोर्ट के फैसले का इंतज़ार किया जायेगा, जबतक हाईकोर्ट का कोई निर्णय नहीं आ जाता उस वक्त तक सिविल कोर्ट कोई फैसला नहीं सुना सकतीं है|मौलाना ने आगे कहा कि इस जगह पर अनन्त काल से मस्जिद बनी हुई है, इसके अलावा एक जगह दो ज्योतिलिंग कैसे हो सकतें है| केंद्र सरकार ने 1991 में धर्म स्थलों से जुड़े विवादों में यता स्थिति बनाये रखने के लिए एक कानून पार्लियामेंट में पास कर चूकी है, इस कानून में बाबरी मस्जिद मुद्दे को बाहर रखा गया था| इस कानून में स्पष्ट तौर पर यह कहा गया है कि 1947 से पहले जो धर्म स्थल जिस स्थिति में था उसी स्थिति में रहेगा, ज्ञानवापी मस्जिद को भी इसी कानून के तहत सुरक्षा मिलीं हुई है|मौलाना ने आगे कहा कि चंद फिरकापरस्त ताकतें भारत की गंगा, जमुनी तहजीब और हिन्दू मुस्लिम इत्तेहाद को तोड़ने में लगी हुई है, इससे देश वासियों को होशियार रहने की जरूरत है, ज्ञानवापी मस्जिद को बाबरी मस्जिद की तरह पोलीटिकल मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रहीं हैं|




